हम आप को ख्वाबों में ला ला के सतायेंगे...
हम आप की आंखों से नींदें ही चुरा ले तो...
- साहिर लुधियानवी, गीता दत्त-रफी, प्यासा (1957)
मैं जब भी ये गाना गुनगुनाता हूँ, इस शायर की शायरी पर ताज्जुब करते नही थकता हूँ!
पुनश्च:
ऑफिस में youtube की इजाज़त नही है। अब लीजिये -
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3 comments:
गाना भी लगा देते या उसका यू ट्यूब लिंक..तो बेहतर रहता. फिर भी आभार..सुनते हैं जाकर.
पूरा गाना लिखते तो बेहतर होता।आभार।
I think you should write the whole song .It will be nice.
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ASTON MARTIN
sapience
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