आजकल बैंगलोर में जोरों कि बारिश हो रही है। प्रतिदिन शाम को झम झमाझम हो ही जा रहा है। गुरुवार की शाम तो कुछ ज्यादा ही बारिश हो गयी और मेरा कुछ अच्छा खासा सामना भी बारिश की मुश्किलों से। BTM के १६ मेंन चौराहे से मेरे घर की दूरी दो किलोमीटर भी नहीं है और मुझे कुछ तीन घंटे लगे ये दूरी तय करने में। उसमें भी आख़िरी का १०० मीटर तो क़मर तक पानी में चल कर आना पड़ा। शुक्र है की मेरी गाड़ी के silencer में पानी नहीं घुसा नहीं तो अच्छे खासे चक्कर में फँस जाता मैं तो। अब आख़िरी के १०० मीटर का किस्सा ये है की मैं किसी तरह अपने घर के पास तो पहुँच गया था पर उसके आगे मेरी हिम्मत नहीं हुयी गाड़ी घुसाने की। सामने पानी हिलोरें खा रहा था, कैसे कैसे एक ऊंची जगह पर गाड़ी खड़ी की और फिर हर हर गंगे!
जब मैं बनारस में था तब BHU से चौक जाने के रास्ते पर BHU द्वार, फिर अस्सी, फिर शिवाला, सोनारपुरा, और सबसे ज्यादा गोदौलिया चौराहे पर पानी भरा मिला करता था, और उसमें हम अपने जूते साइकिल के हैंडल पर बाँध देते थे और छपर छपर करके घर जाया करते थे। मजा आता था। काफी दिनों बाद फिर ऐसा पानी दिखा पर मजा तो बिल्कुल भी नहीं आया बल्कि दिमाग में यही बात आ रही थी कि ये पानी कितना गन्दा होगा।
बारिश की वजह से पिछले दो दिनों से बैंगलोर में जगह जगह लंबे लंबे जाम लग रहे हैं। कही कही पानी ऐसा भरा है की निकल ही नहीं रहा है। शायद सोमवार से लोगों को कुछ रहत मिले।
Saturday, September 15, 2007
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3 comments:
manish bhai aapne baat to bilkul sahi kahi ...vrihaspati vaar ki shaam ko to mujhe aisa lagaa ki mere jeevan ki aakhri shaam hain..such much bangalore ki vaarish ne sabko pareshaan kar rakhaa hain
बढ़िया बरसाती रिपोर्ट. बैगलोर की यह हालत हो रही है?
साल दो साल में एक बार ऐसा हो जाता है यहाँ. पर फिर भी ऐसा नही है कि बैंगलोर रुक जाये. अगले दिन फिर उठ खड़ा होता है और काम धाम चलता रहता है.
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