मेरे एक मित्र हैं यहाँ बैंगलोर में, यहीं के रहने वाले हैं, मतलब कन्नड़ा उनकी मातृभाषा है। उनके पास एक रोज एक फ़ोन आया। उधर से बन्दा पहले टूटी फूटी अंगरेजी में बोला फिर हिंदी में बोलने लगा। इन साहब की हिंदी भी अच्छी है तो ये भी हिंदी में बात करने लगे। पर उधर वाला हिंदी भी टूटी फूटी बोल रहा था। फिर हमारे मित्र नें कहा "कन्नड़ा बरता?" ("कन्नड़ा आती है क्या?")। फिर दोनों कन्नड़ा में बात करने लगे। मेरे मित्र के चेहरे पर सर पीटने जैसा भाव था और मेरी हंसी रोके नही रूक रही थी।
बड़े बड़े शहरों में जहां जगह जगह से लोग आ कर रहते हैं वहां ऎसी छोटी छोटी बातें होती ही रहती हैं।
Saturday, September 8, 2007
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1 comments:
हा हा, चलो अगली बार से पता रहेगा।
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