बैंगलोर में BMTC के बस ड्राईवरों को पता नहीं क्या शौक है कि किसी भी बस स्टाप पर अगर पहले से कोई बस खड़ी होगी तो उसके पीछे कभी बस नहीं खड़ी करेंगे, पहले overtake करेंगे और फिर खड़ी बस के आगे जाके बस रोकेंगे। तो इस वजह से दो बार सड़क पर ट्राफिक रूकती है, पहली बार बाद वाली बस की नवाबी से और दूसरी बार जब पहले से खड़ी बस नयी बस को overtake करती है तब। अब यहाँ इतनी चौड़ी सड़कें तो हैं नहीं जितनी ये सोचते हैं, दो बसें साथ में खड़ी हो जाएँ तो अस्सी प्रतिशत सडकों पर जाम लग जाता है।
पता नहीं ये common sense कब किसी के दिमाग में घुसेगा और इन बस चालकों को कोई ऐसा करने से मना करेगा! और ये मान जायेंगे!!
Sunday, September 2, 2007
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2 comments:
धरना दीजिए, आंदोलन करिए क्योंकि आम आदमी इससे ज्यादा क्या कर सकता है. और कुछ नहीं हो सकता तो बंगलौर छोड़कर दिल्ली चले आईये. ब्लू लाईन में सफर करिए. बंगलौर की बसे अच्छी लगने लगेंगी ऐसा मेरा विश्वास है.
ब्लू लाईन बसों की दूसरी ही समस्या है। उनके पास भगाने के लिए रोड पर बहुत जगह है और कोई चीज़ जब ज्यादा हो जाती है तो समस्या तो होती ही है। बैंगलोर कि सडकों पर इतनी जगह नहीं है (शुक्र है!) कि पहले १०० पर भागो फिर फटाक से बायें मोड़ दो बस स्टाप के कही आस पास। बैंगलोर शहर में उस तरह कि दुर्घटनाएं तो नहीं ही होती हैं। हालांकि मेरे पास कोई नंबर नही है ऐसा कुछ साबित करने के लिए।
पर यहाँ पर पहले से ही धीरे धीरे चल रही ट्राफिक में जब आपको इस तरह की बिना वजह की overtaking दिखती है तो ब्लॉग करना ही पड़ जाता है।
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