एफ एम रेडियो के Filler कार्यक्रम बड़े ही मज़ेदार होते हैं। बैंगलोर में रेडियो सिटी पर मिस लैन्गोलिला, अंकल अप्पू कुट्टन, वासुदेव, बब्बर शेर और रेडियो वन पर फोकट मामू। इन सबमें आपको ज़मीन की खुशबूं आएगी। कॉमेडी है इसमें कोई दो राय नही पर जिनके दिमाग से ये निकलते हैं, मैं उनके दिमाग की दाद दूंगा.
जैसे बब्बर शेर में शायरी कहने वालों का जो हिंदी बोलने का अंदाज़ है वो बिल्कुल पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में लोगों के हिंदी बोलने के अंदाज़ जैसा है। उसी तरह अंकल अप्पू कुट्टन का हिंदी बोलने का मलयाली अंदाज़ अलग है और फोकट मामू का उर्दू बोलने का अंदाज़ बिल्कुल दक्षिण भारत में जैसे उर्दू बोलते हैं उस से मिलता है। कार्यक्रम बनाने वालों नें इन सब बारीकियों का बड़ा ही ध्यान रखा है।
- मनीष
Saturday, July 21, 2007
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2 comments:
हिन्दी ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है। सही कहा आपने, यही सूक्ष्म विशेषताएँ तो इन एफ़एम कार्यक्रमों को रोचक बनाती हैं।
अरे सही, मेरे हिंदी ब्लॉग के पाठक भी हैं। वाह!
धन्यवाद प्रतीक !
मनीष
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