Monday, July 2, 2007

प्रथम ब्लॉग!

कल जब मुझे पता चला कि ब्लॉगर में अब हम हिंदी में भी ब्लॉग कर सकते हैं तो मैंने फ़टाफ़ट अपने प्रतिदिन के ब्लॉग में हिंदी में एक ब्लॉग भी कर दिया। उसके बाद आज मैंने ये एक नया ब्लॉग पृष्ठ भी बना दिया। यह इतना सुविधाजनक है कि मैं तो बस आज इसी में लगा हुआ हूँ। देखते हैं कि कब ये उत्साह बरकरार रहता है। अभी तो हिंदी याद कर कर के लिखनी पड़ रही है पर उम्मीद है कि जल्दी ही मुझे अपनी पुरानी गति मिल जायेगी। सच में अगर प्रतिदिन अभ्यास ना करें तो अपनी मातृभाषा लिखने में भी समस्या आ सकती है। सच कहता हूँ, पहले मुझे अपने हिंदी ज्ञान पर काफी गर्व था, अब भी है पर जब से ब्लॉग लिख रह हूँ एहसास हो रह है कि "अभ्यास अर्जुन अभ्यास" वाले संवाद का क्या महत्व है। मुझसे अच्छा तो ये गूगल वाले हिंदी जानते है! खैर गूगल में जिन्होंने हिंदी में ब्लॉग लिखने कि सुविधा डाली होगी वो तो भारतीय ही होंगे। जिसनें भी लिखा है बहुत दिमाग लगा कर लिखा है, व्याकरण का भी काफी ख़याल रखा है और किस तरह से कौन सा शब्द कहाँ पर आएगा इस सब का ध्यान रखा है।

मुझे याद है १९९९ में जब मैंने नौकरी करना शुरू किया था तभी मैं इन्टरनेट के सम्पर्क में आया और तब मैंने एक बार पूरी रात बैठ कर epatra.com का transliterator इस्तेमाल करके अपने पापा मम्मी को हिंदी में पत्र लिखा था। मतलब लिखने के बाद उसका printout निकाल कर डाक के द्वारा पत्र भेजा था। तब से अब तक के transliterator में जमीन आसमान का फर्क आ गया है।

चलिये फिर आज के लिए बस इतना ही, कह नही सकता कि अगला पोस्ट कब करुंगा। पर अभी मैं काफी उत्साहित हूँ ये तो आपको लग ही गया होगा। पढ़ने के लिए धन्यवाद। फिर मिलेंगे।

मनीष

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