Monday, September 28, 2009
बच्चों के मुख से!
आज जब हमारी पूना से बंगलोर की हवाई यात्रा खत्म होने को आयी तो एक मजेदार बात हुयी। हमारा विमान जैसे ही बादलों से उतरा और जब ज़मीन दिखाई पड़ने लगी तो हमारे पुत्र नें कहा - "हम लोग land करने ही वाले हैं, पायलट अंकल Airport ढूंढ रहे हैं"।
Thursday, February 19, 2009
गाने!
हम आप को ख्वाबों में ला ला के सतायेंगे...
हम आप की आंखों से नींदें ही चुरा ले तो...
- साहिर लुधियानवी, गीता दत्त-रफी, प्यासा (1957)
मैं जब भी ये गाना गुनगुनाता हूँ, इस शायर की शायरी पर ताज्जुब करते नही थकता हूँ!
पुनश्च:
ऑफिस में youtube की इजाज़त नही है। अब लीजिये -
हम आप की आंखों से नींदें ही चुरा ले तो...
- साहिर लुधियानवी, गीता दत्त-रफी, प्यासा (1957)
मैं जब भी ये गाना गुनगुनाता हूँ, इस शायर की शायरी पर ताज्जुब करते नही थकता हूँ!
पुनश्च:
ऑफिस में youtube की इजाज़त नही है। अब लीजिये -
Saturday, February 7, 2009
चावल बिनना
आज चावल धोते हुए मेरे चावल बीनने का इतिहास याद आ गया -
पहले मम्मी से बोलते थे, लाइए हम बीन देते हैं। उसके बाद शुरू होता था प्रोजेक्ट। ये क्या है, ये कैसा काला काला सा चावल है। फिर काफी देर बाद मम्मी बोलती थी, तुम रहने दो, मेरा पूरा खाना बन गया और तुम अभी कंकड़ में से चावल बिन रहे हो।
अब - कोई बात नही, चलता है, I'm a non-vegetarian!
पहले मम्मी से बोलते थे, लाइए हम बीन देते हैं। उसके बाद शुरू होता था प्रोजेक्ट। ये क्या है, ये कैसा काला काला सा चावल है। फिर काफी देर बाद मम्मी बोलती थी, तुम रहने दो, मेरा पूरा खाना बन गया और तुम अभी कंकड़ में से चावल बिन रहे हो।
अब - कोई बात नही, चलता है, I'm a non-vegetarian!
Thursday, July 31, 2008
खबरें...
आज सुबह ८ बजे NDTV India के न्यूज़ २०-२० में पहली तीन खबरें -
१ - आसाराम बापू के छिन्दवारा आश्रम में एक बच्चे की मौत (५ min की ख़बर में मरे बच्चे की धुंधली तस्वीर दसियों बार दिखायी गयी)
२ - गौतमी एक्सप्रेस में आग, २ जले शव मिले।
३ - मुंबई में गला रेत कर ह्त्या।
फिर हमने channel बदल दिया। दिमाग में यही बात आ रही थी कि इतनी सारी खबरों में संपादक महोदय को सिर्फ़ ये मरने मारने वाली खबरें ही नज़र आयी पहली तीन बादानों पर। मंगल पर पानी मिला है, सहवाग नें शतक लगाया है वो दिखाओ, सुबह सुबह ये सब क्या दिखा रहे हो?
१ - आसाराम बापू के छिन्दवारा आश्रम में एक बच्चे की मौत (५ min की ख़बर में मरे बच्चे की धुंधली तस्वीर दसियों बार दिखायी गयी)
२ - गौतमी एक्सप्रेस में आग, २ जले शव मिले।
३ - मुंबई में गला रेत कर ह्त्या।
फिर हमने channel बदल दिया। दिमाग में यही बात आ रही थी कि इतनी सारी खबरों में संपादक महोदय को सिर्फ़ ये मरने मारने वाली खबरें ही नज़र आयी पहली तीन बादानों पर। मंगल पर पानी मिला है, सहवाग नें शतक लगाया है वो दिखाओ, सुबह सुबह ये सब क्या दिखा रहे हो?
Saturday, May 17, 2008
आज के गाँधी जी
ये कथा मैंने बहुत पहले अपने अंग्रेज़ी Blog में लिखी थी। आज बात बात में याद आ गई तो सोचा कि उसका हिन्दी में अनुवाद कर देता हूँ -
एक बार टीवी पर रिचर्ड एटेंबरो की गाँधी फ़िल्म आ रही तो मेरे सुपुत्र नें थोड़ी देर तक तो बड़े ध्यान से देखा और फिर पूछा - "बोले तो अंकल कहाँ हैं?"।
एक बार टीवी पर रिचर्ड एटेंबरो की गाँधी फ़िल्म आ रही तो मेरे सुपुत्र नें थोड़ी देर तक तो बड़े ध्यान से देखा और फिर पूछा - "बोले तो अंकल कहाँ हैं?"।
Tuesday, May 13, 2008
सरकारी सेवायें - बी एस एन एल...
अगर आप किसी सरकारी कम्पनी की सेवा का उपयोग कर रहे हैं, तो एक बात पर आपका ध्यान अवश्य गया होगा। अगर ये चलती हैं तो बहुत बढ़िया चलती हैं, पर कहीं अगर ढर्रे से अलग कुछ हो गया तो आपका बैंड बज जाता है। मैंने बी एस एन एल बंगलोर की इंटरनेट तथा टेलीफोन सेवा की कई बार कई जगह पर कई लोगों से तारीफ की है पर आदत से मजबूर जब ये तकलीफ देते हैं तो कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं।
मैंने कुछ ९-१० महीने पहले बंगलोर में ही एक ही टेलीफोन एक्सचेंज के अंतर्गत ही, अपना घर बदला। टेलीफोन स्थानांतरण के लिए जुलाई महीने के आख़िर में ऍप्लिकेशन दी। शिफ्ट होते होते अप्रैल हो गया। कोई बात नही, कुछ नयी लाईन बिछानी थी इसलिए ८ महीना लग गया। शुरू के तीन महीने मैंने बिल भी पे किया पर जब शिफ्टिंग का कोई सीन नही दिख रहा था तो मैंने लेखा अधिकारी से बात करी और पेमेंट करना बंद कर दिया। आखिर फ़ोन इस्तेमाल में तो था नही। १ अप्रैल को फ़ोन लगा है और ७ या ८ अप्रैल को नॉन-पेमेंट के चलते फ़ोन कट गया। मैंने सोचा सरकारी ऑफिस है, कोई ताज्जुब नही! फिर मैं उनके लेखा अधिकारी ऑफिस गया, १५ मिनट के अन्दर उन्होंने समस्या का निवारण कर दिया। मैं बड़ा खुश, चलो अन्दर से कोई कोऑर्डिनेशन नही है पर कम से कम जब ग्राहक मिलने आता है तो समस्या को तुरंत समझ कर निवारण तो करते हैं। अपने बी एस एन एल वाराणसी के १० साल पहले के अनुभव से ये तो कई गुना अच्छा है।
कल शाम को उन्होंने फिर से मेरा फ़ोन काट दिया - नॉन-पेमेंट के चलते। ८ महीने फ़ोन काम नही कर रहा था, उसमें से मैंने ३ महीनें बिल का भुगतान भी किया। इस हिसाब से बी एस एन एल को तो मुझे पैसा देना बनता है। उल्टे वो मेरा ही फ़ोन काट दे रहे हैं। वो भी दो बार मैं जब ख़ुद जा कर के उनसे मिल चुका हूँ तब। आज फिर मैं उनसे मिल कर आया, इतना प्यार है मुझे अपने सरकारी फ़ोन से। फिर उन्होंने फटाफट मेरा काम कर दिया, पुराने बिल कैन्सल वगैरह वगैरह। देखता हूँ, अगले महीनें क्या होता है!

एक और छोटी सी कथा है irctc को लेके। फिर कभी...
मैंने कुछ ९-१० महीने पहले बंगलोर में ही एक ही टेलीफोन एक्सचेंज के अंतर्गत ही, अपना घर बदला। टेलीफोन स्थानांतरण के लिए जुलाई महीने के आख़िर में ऍप्लिकेशन दी। शिफ्ट होते होते अप्रैल हो गया। कोई बात नही, कुछ नयी लाईन बिछानी थी इसलिए ८ महीना लग गया। शुरू के तीन महीने मैंने बिल भी पे किया पर जब शिफ्टिंग का कोई सीन नही दिख रहा था तो मैंने लेखा अधिकारी से बात करी और पेमेंट करना बंद कर दिया। आखिर फ़ोन इस्तेमाल में तो था नही। १ अप्रैल को फ़ोन लगा है और ७ या ८ अप्रैल को नॉन-पेमेंट के चलते फ़ोन कट गया। मैंने सोचा सरकारी ऑफिस है, कोई ताज्जुब नही! फिर मैं उनके लेखा अधिकारी ऑफिस गया, १५ मिनट के अन्दर उन्होंने समस्या का निवारण कर दिया। मैं बड़ा खुश, चलो अन्दर से कोई कोऑर्डिनेशन नही है पर कम से कम जब ग्राहक मिलने आता है तो समस्या को तुरंत समझ कर निवारण तो करते हैं। अपने बी एस एन एल वाराणसी के १० साल पहले के अनुभव से ये तो कई गुना अच्छा है।
कल शाम को उन्होंने फिर से मेरा फ़ोन काट दिया - नॉन-पेमेंट के चलते। ८ महीने फ़ोन काम नही कर रहा था, उसमें से मैंने ३ महीनें बिल का भुगतान भी किया। इस हिसाब से बी एस एन एल को तो मुझे पैसा देना बनता है। उल्टे वो मेरा ही फ़ोन काट दे रहे हैं। वो भी दो बार मैं जब ख़ुद जा कर के उनसे मिल चुका हूँ तब। आज फिर मैं उनसे मिल कर आया, इतना प्यार है मुझे अपने सरकारी फ़ोन से। फिर उन्होंने फटाफट मेरा काम कर दिया, पुराने बिल कैन्सल वगैरह वगैरह। देखता हूँ, अगले महीनें क्या होता है!

एक और छोटी सी कथा है irctc को लेके। फिर कभी...
Labels:
Bangalore,
गुस्सा,
बी एस एन एल,
समस्या,
सरकारी सेवाएं
Saturday, May 10, 2008
लालू का राज...
मेरे नाना जी नें इस बार एक बात कही जो मेरे दिमाग में काफी गहरा असर कर गयी - "लालू पहले ऐसे रेल मंत्री हैं जिनके राज में रेल किराया बढ़ा ही नही।" और मैं एसी किराए की बात नही कर रहा हूँ जो शायद बढ़ता घटता रहा है, ये बात हो रही है साधारण दर्जे के रेल किराये की जहाँ पर नाम मात्र की बढोतरी भी नहीं की गयी है।
कहते हैं, आम जनता की याददाश्त बहुत छोटी होती है पर अगर कुछ काम नजर आए तो जनता याद भी रखती है। टीवी न्यूज़ चैनल लालू पर कितनी ही टीका टिप्पडी करें, इस point पर जनता में उनका acknowledgement है।
कहते हैं, आम जनता की याददाश्त बहुत छोटी होती है पर अगर कुछ काम नजर आए तो जनता याद भी रखती है। टीवी न्यूज़ चैनल लालू पर कितनी ही टीका टिप्पडी करें, इस point पर जनता में उनका acknowledgement है।
Subscribe to:
Posts (Atom)

